सफर जारी है 26
#सफर_जारी_है_ 26
सरदी रो मौसम सुरु होग्यो। सरदी आवण रै साथै रेहड़ीयां अर दुकानां पर रेवड़ी, गजक, मुंगफली, पापड़ी आप'री सोरम स्यूं लोगां नै आपरे कानी खैंचण लाग ज्यावै। सूरतगढ़ बस अड्डे पर भी ओ'हीज हाल है। बस चालणै में देरी है। म्हूं बस रै कनैं खड़्यो हूं। कनैं ही मुंगफली री रेहड़ी है अर बीं रै कनैं ही चाय रो ढाबो। चाय अर मुंगफली री रळी-मळी सोरमं म्हनै म्हारै खेतां मांय लै'गी। म्हूं अर छोटो भाई बनवारी खेत मांय बैठ्या हां। नरमे चुगाई रो सीजन चालै। भाईड़ो इनै बींनै स्यूं लकड़ी अर बूइ-सिंणयो लै आयो। डोळी मांय बाटी स्यूं खोद'र चुल्हो बणायों अर बीं पर अेक बरतन मांय पाणी चढ़ा दियो चाय रो। लकड़ी सिली होवण रै कारण आग कमती अर धुंओ ज्यादा है। इण धुंअ स्यूं चौसरा बहीर हुग्या। भाई फूंक मार'र आग तो जगा दी पण धुंओ सांसा साथै कंठा मांय जावण स्यूं धांसी ऊं उलझ ग्यो। भाईड़ो सांस लेवण ने थोड़ो अळगो हुग्यो। म्हूं चाय बणाऊं। चाय री धुंअ साथै रळी-मिळी सोरम बोहत चौखी लागै। म्हैं भाई ने कैयो, आज्या चाय बणगी। चुगारा ने ही बुला लै। मुंगफली पकाई माथे ही, भाई आंवतो दो-च्यार बुंटा पाड़ ल्यायो। चाय उतारै पछै खिरा माथै रख भूंद'ली। खिरा सजळ कम हा जिण स्यूं आधी भूंदी'ज गी अर आधी काची रै'गी। हाथां मांडेड़ी चाय अर काची-पाकी मुंगफली बड़ी सुआद लागरी ही।
निज री मेहनत स्यूं मिलणआळी चीज़ रा आंनद ही न्यारा होवै जिण रो सब्दां मांय बखान करणों ओखौ है। मेहनत स्यूं कमाई बासी रोटी छप्पनभोग स्यूं ही सुआद लागै।
म्हूं आं विचारां मांय गट्टामैळी खाण लाग रैयो हो इतां मांय असलम भाई आ'र बोल्या " किनै खो ग्या भाईजान। बस रो बगत होग्यो। आओ चालां।"
म्हूं आ कैंवतो थकां बस कानी बहीर हुग्यो कै ईंया ही कोई बात याद आगी ही......
सफर जारी है.........
सरदी रो मौसम सुरु होग्यो। सरदी आवण रै साथै रेहड़ीयां अर दुकानां पर रेवड़ी, गजक, मुंगफली, पापड़ी आप'री सोरम स्यूं लोगां नै आपरे कानी खैंचण लाग ज्यावै। सूरतगढ़ बस अड्डे पर भी ओ'हीज हाल है। बस चालणै में देरी है। म्हूं बस रै कनैं खड़्यो हूं। कनैं ही मुंगफली री रेहड़ी है अर बीं रै कनैं ही चाय रो ढाबो। चाय अर मुंगफली री रळी-मळी सोरमं म्हनै म्हारै खेतां मांय लै'गी। म्हूं अर छोटो भाई बनवारी खेत मांय बैठ्या हां। नरमे चुगाई रो सीजन चालै। भाईड़ो इनै बींनै स्यूं लकड़ी अर बूइ-सिंणयो लै आयो। डोळी मांय बाटी स्यूं खोद'र चुल्हो बणायों अर बीं पर अेक बरतन मांय पाणी चढ़ा दियो चाय रो। लकड़ी सिली होवण रै कारण आग कमती अर धुंओ ज्यादा है। इण धुंअ स्यूं चौसरा बहीर हुग्या। भाई फूंक मार'र आग तो जगा दी पण धुंओ सांसा साथै कंठा मांय जावण स्यूं धांसी ऊं उलझ ग्यो। भाईड़ो सांस लेवण ने थोड़ो अळगो हुग्यो। म्हूं चाय बणाऊं। चाय री धुंअ साथै रळी-मिळी सोरम बोहत चौखी लागै। म्हैं भाई ने कैयो, आज्या चाय बणगी। चुगारा ने ही बुला लै। मुंगफली पकाई माथे ही, भाई आंवतो दो-च्यार बुंटा पाड़ ल्यायो। चाय उतारै पछै खिरा माथै रख भूंद'ली। खिरा सजळ कम हा जिण स्यूं आधी भूंदी'ज गी अर आधी काची रै'गी। हाथां मांडेड़ी चाय अर काची-पाकी मुंगफली बड़ी सुआद लागरी ही।
निज री मेहनत स्यूं मिलणआळी चीज़ रा आंनद ही न्यारा होवै जिण रो सब्दां मांय बखान करणों ओखौ है। मेहनत स्यूं कमाई बासी रोटी छप्पनभोग स्यूं ही सुआद लागै।
म्हूं आं विचारां मांय गट्टामैळी खाण लाग रैयो हो इतां मांय असलम भाई आ'र बोल्या " किनै खो ग्या भाईजान। बस रो बगत होग्यो। आओ चालां।"
म्हूं आ कैंवतो थकां बस कानी बहीर हुग्यो कै ईंया ही कोई बात याद आगी ही......
सफर जारी है.........
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