सफर जारी है 28
#सफर_जारी_है 28 सफर चाहै जिंदगी रो होवे, चाहै कोई साधन रो होवे, हर रोज नूंवा सबक सिखावै। सरदी रो मौसम आपरी रंगत मांय आय रैयो है। इण ठंड मांय रोज आपरै काम धंधे माथै जावणिया बस अड्डे माथै चाय सुड़कता मिल ज्यावै। आज कमरे स्यूं थोड़ो जल्दी चाल पड़्यो। बस चालणै में देरी ही। म्हूं एक ढाबे माथै चाय पी रैयो हूं। अेक जनानी भी बीं ढाबे माथै बैठी है। साथै छोटो टाबर है। जनानी मोबाइल देखण लाग'री है। टाबर खनै खेल रैयो है। आजकल ओ मोबाइल रो चस्को तकड़ो है। जिण नै देखां मोबाइल मांय डुबयोड़ो दिसे। बीं नै अपणे आसपास स्यूं कोई मतलब कोनी। इण रो कितो गलत असर पड़ै, कोई कोनी सोचै। टाबर बीच बीच मांय आपरी मां नै बतलावण री खेचळ करै, पण बा जनानी हूं हां उथळो दे देवै पण टाबर खानी कोनी देखे। खेलतो खेलतो टाबर आखतो होर हाथ मारयो अर मां रै हाथा स्यूं मोबाइल नीचे पड़ग्यो। पड़तै ही मोबाइल री स्क्रीन फूटगी। मां बेगो सो मोबाइल उठायो। मोबाइल रो हाल देख'र दो तीन लपड़ टाबर रै जड़ दिया। टाबर जोर जोर स्यूं रोवण लाग गियो। जनानी अब ताईं बरड़ावै कै मरजाणै दस हजार रो नास कर दियो। मोबाइल री स्क्रीन फोड़ दी। बीं र...