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Showing posts from April 22, 2020
लघुकथा  बंटवारा  *बँटवारा* घर का सारा सामान आँगन में निकाला जा रहा है। छोटी बड़ी जो भी वस्तु है, बाहर आ गई है। अब सभी वस्तुओं को बराबर चार भागों में बांटने का उपक्रम हो रहा है। सभी को एक जैसा मिले, ऐसा प्रयास हो रहा है। बहुएँ चालाकी करना चाहते हुए भी नहीं कर पा रही। पता नहीं कौनसा हिस्सा उनका हो। कहीं चालाकी के चक्कर में दूसरे को ज्यादा न मिल जाए। रामलाल ने आज चारों बेटों को अलग-अलग करने का फैसला कर लिया। पिछले साल भर से घर का माहौल लगातार ख़राब हो रहा है। छोटी-छोटी बातों के लिए माहौल तनावपूर्ण हो रहा था। अभी लड़ाई घर की दीवारों में ही है। यह निकलकर बाहर आए, इससे पहले रामलाल ने सबको अलग करने के बारे में निर्णय ले लिया।         जमीन और घरेलू सामान का बँटवारा होने के बाद सवाल खड़ा हुआ कि रामलाल और उनकी पत्नी किसके साथ रहेंगी। माँ-बाप दोनों छोटे के साथ ही रहना चाह रहे हैं क्योंकि स्वाभाविक तौर पर सबसे छोटी संतान से माँ-बाप का मोह ज्यादा होता है। परन्तु सबसे पहले उसी ने जवाब दे दिया। बच्चे छोटे होने का हवाला देते हुए कहा कि मेरे से इनकी सेवा नहीं हो पाएगी...