सफर जारी है 37
#सफर_जारी_है_37 बस के इंतजार में खड़ा हूं। राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण हर दस मिनट बाद बस मिल जाती है। एक बस अभी सामने से निकल गई। दूसरी बस में अभी दस मिनट है। दोपहर का समय होने के कारण कुछ धूप है। परन्तु मौसम में ठंडक होने के कारण इतनी महसूस नहीं हो रही। मैं, असलम जी, भाग सिंह जी, प्रतिमा जी और हिमानी जी आपस में बातचीत में मशगूल हैं। विद्यालय के दो पूर्व छात्र आए। नमस्कार के बाद असलम जी ने उनकी पढ़ाई की बात शुरू कर दी। एक विद्यार्थी बोला, सर मैं पटवारी की तैयारी कर रहा हूं। मुझे हर हाल में नौकरी लगना है। घर का माहौल पढ़ाई के लिए सही नहीं है। कभी कोई समस्या तो कभी कोई। इससे मेरा ध्यान पढ़ाई में लग नहीं पाता। मुझे क्या करना चाहिए। असलम जी कोई जवाब देते उससे पहले प्रतिमा जी बोल उठे, तुम्हारे प्रश्न का जवाब मैं देती हूं। मैंने कहीं एक कहानी पढ़ी थी। उसे सुनकर तुम निर्णय करना कि क्या करना है। किसी जंगल मे एक गर्भवती हिरणी थी, जिसका प्रसव होने को ही था। उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा। ...