###सफर_जारी_है__4 236RD से संजय गुरूजी बस में चढ़े और हमें देखकर हमारे पास वाली सीट पर आ कर बैठ गए। हाय हैलो नमस्कार के बाद स्कूल की, पढ़ाई की बातें चल पड़ी। पहले वाले गुरूजी बोले,"गुरूजी मैं इनको कह रहा था कि मेरे कोशिश करने के बावजूद बच्चे नहीं सीख रहे। इन्होंने एक दो उदाहरण से संतुष्ट किया कि दृढ़ निश्चय और पक्के इरादे से कोई भी काम असंभव नहीं है। परंतु गुरूजी हमारे काम को कोई महत्व नहीं देता। संजय जी बोले,"गुरूजी, जो लोग वास्तव में काम करते हैं तथा वो कभी प्रशंसा के भूखे नहीं होते। वे अपना काम चुपचाप करते रहते हैं। दुनिया उनके बारे में क्या कहती है, वे परवाह नहीं करते हैं। उनका महत्त्व वो जानते हैं जो उनसे काम लेते हैं। पिछले दिनों हमारी उदयपुर में ट्रेनिंग चल रही थी। हम में से ज्यादातर पहली बार उदयपुर आए थे। सब इस अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहते थे। इसलिए हमारा ध्यान ट्रेनिंग से ज्यादा बाहर घूमने पर रहता था। समय मिलते ही हम घूमने निकल पड़ते थे। जब क्लास में होते तब भी हम अन्य बातें करते रहते। एक सम्भागी पूरे दिन क्लास में बैठा रहता और अपने लेपटॉप पर काम करता रहत...
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