#सफर_जारी_है__9 .....सफर का लुत्फ हर कोई अपने तरीके से उठाता है। कोई चुपचाप बैठे बैठे सफर करता है, कोई सफर में बेठते ही सो जाता है। बातूनी को यदि कोई हथाई वाला मिल जाए तो लम्बा सफर भी बहुत छोटा लगता है और चुपचाप रहने वाले के पास यदि बातूनी बैठ जाए तो छोटा सफर भी बहुत लंबा हो जाता है। मेरा तो आपको पता ही है। सफर हमारा जारी है। बस लडाणा से रवाना हो चुकी है। बस की रफ़्तार साथ ही हमारी बातचीत भी रफ़्तार पकड़ चुकी है। बराबर की सीट पर बैठे दो सवारियों में से एक, दूसरे से बोला" तेरी ये आदत बहुत खराब है। कोई भी काम शुरू करने से पहले कह देता है कि ये तो नहीं होगा। अभी काम शुरू ही नहीं किया और तुझे पता चल गया कि ये तो नहीं होगा। होगा, नहीं होगा, ये बाद की बात है। पहले कोई काम शुरू तो कर।" "यार मैं जो भी काम शुरू करता हूं, पूरा नहीं होता। कुछ न कुछ ऐसा होता है कि काम बीच में रूक जाता है।" दुसरे ने जवाब दिया। "अच्छा, एक बात बताओ। जब भी कोई काम शुरू करते हो तो सबसे पहले दिमाग में क्या आता है।" " सबसे पहले यही बात दिमाग में यही आती है कि पता नहीं कैसे ...
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