सफर जारी है .....2
सफर जारी है.....2 330RD पर काफी सवारियां उतर गई। दो गुरूजन बस में आये और उसी सीट पर आ कर बैठ गये। मेरे साथ हाय-हैलो के बाद अपनी हथाई शुरू कर दी। हथाई के बिंदु सरकारी स्कूल और उनके बच्चे है। एक गुरूजी बोले "हालत बहुत खराब है। बच्चे कुछ सीखना ही नहीं चाहते। मैं पूरी कोशिश करता हूं फिर भी कोई बदलाव नहीं है।" दुसरे गुरूजी बोले "बदलाव आएगा। सुन अभी कुछ दिन पहले मैं ट्रेन से हनुमानगढ़ जा रहा था। एक आदमी एक टोकरी में कुछ आम लेकर चढ़ा। आम भी कैसे , अच्छे अच्छे आम बिकने के बाद बचे खुचे। मैंने उसकी टोकरी देखकर कहा,"भले आदमी इनको कौन खरीदेगा?" वो आम वाला बोला,"बाबूजी मैं सारे आम बेचूंगा और अभी आपके सामने बेचूंगा।" गाड़ी चलते ही वो आवाज लगाने लगा,"दस के दो ,दस के दो, छांट छांट कर लो। " थोड़ी देर में उसके आधे आम बिक गए। अब वो मेरे पास और बोला, साहब जी आधे आम बेच दिये।" अब उसकी टोकरी जो आम बचे थे वो ज्यादा खराब थे। मैं बोला,"ये तो तेरे नहीं बिकेंगे।'" उस टोकरी वाले ने बहुत सुंदर जवाब दिया " बाबूजी कोई किसी क...