सफर जारी है 36
#सफर_जारी_है_36 भयंकर गर्मी, गर्मी के बाद बारिश, फिर गर्मी और अब फिर बारिश। मौसम खुशगवार है। सफर शुरू हो चुका है। इन दिनों खेतों में फसलें पूरी रंगत में है। किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। उनकी खुशी उनकी बातों से झलकती है। अगर किसान है, तो खेतों में जान है। खेतों में जान है तो किसान के चेहरे पर मुस्कान है। एक सीट पर मैं और असलम बैठे हैं तो बराबर की सीट पर किसान भाई बैठे हैं। उनकी चर्चा का विषय खेती-बाड़ी है। "अबकी बार नरमा अच्छा खड़ा है।" एक किसान बोला। दूसरे ने कहा,"हां। इस बार मौसम साथ दे रहा है और नहरों में भी पानी समय पर आ रहा है।" पहले ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा,"मेरे आठ बीघो में जिनमें पहले बिजाई की थी, अच्छा है। बाकी कुछ हल्का है।" दोनों की बातचीत में तीसरा शामिल होते हुए बोला, "दोनों में फर्क तो होगा ही। पहले वाले में तुमने दो बार कल्टीवेटर लगाए। फिर एक बार तोई से जमीन को दुबारा अच्छी तरह मिलाया। फिर एक बार फिर कल्टीवेटर लगाने के बाद बिजाई की है। दूसरे में एक बार ही कल्टीवेटर लगाने के बाद बिजाई कर दी। जैसी मेहनत की है वैसा तो खड़ा ही है।...