सफर जारी है 27
नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट #सफर_जारी_है_ हिन्दी और राजस्थानी दोनों में। आनंद से पढ़िए। पसंद आएं तो टिप्पणी अवश्य करें। केवल लाइक कर उपस्थिति दर्ज न कराएं। अपने अमूल्य सुझाव अवश्य दें। आपके सुझाव मुझे परिष्कृत करने के साथ मेरा हौसला अफजाई भी करते हैं तो लो पेश है आज का सफरनामा......... #सफर_जारी_है_27 सुबह बस स्टैंड पर एक दो बसें खड़ी है। ज्यादा भीड़ भी नहीं है। इक्का दुक्का सवारियों के अलावा पूरा परिसर खाली है। कल पूरे दिन तथाकथित सभ्य और स्वच्छ समाज द्वारा असभ्य तरीके से बिखेरे गए कचरे को समाज द्वारा असभ्य और अस्वच्छ मानें जाने वाले तबके का एक शख्स साफ कर रहा है। उसके हाथ में एक लम्बी झाड़ू है जिससे सफाई करता जा रहा है और अपने साथ एक तीन पहियों की छोटा गाड़ी नुमा कचरा पात्र ले रखा है , जिसके द्वारा कचरा एक जगह इकट्ठा कर रहा है। यह सफाईकर्मी अमूमन रोजाना मुझे इसी परिसर में मिलता है। बस स्टैंड के दुसरे गेट पर एक बस खड़ी है जो अब चलने की तैयारी में है। बस के पास ही एक होटल, एक फलों की रेहड़ी और एक छोटी रेहड़ीनुमा दुकान है,जिस छोटा मोटा सामान जैसे टोपियां, चाकलेट, मुंगफली, बीड़ी ...