#सफर_जारी_है_ 10 ......बस की रफ्तार के साथ साथ बातें भी रफ़्तार पकड़ रही है। अब वह सवारी जो अपने मित्र को सकारात्मक सोच की शिक्षा दे रहा है, बोला,"हमें अपनी मंजिल पाने के लिए मेहनत तो करनी पड़ेगी। निराश होकर बैठने से मंजिल मिलने से रही। हमारे पास जो भी संसाधन हैं उनका सकारात्मक सोच के साथ करेंगे तो सफलता मिल जाएगी। हम जो भी कर्म या काम करते हैं उसका कोई तो प्रतिफल मिलेगा। एक कहानी तो तुमने सुनी होगी। एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं थीं। पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था। वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है। पर कहीं न कहीं उसे अपने आप पर यकीन था कि कुछ तो होगा और उसे पानी मिल जाएगा। तभी उसे एक झोंपड़ी दिखाई दी। उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था। पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था। आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी। वह अपनी बची ...
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