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Showing posts from June 1, 2020
सफर_जारी_है_22 पालीवाला की तरफ सफर शुरू हो चुका है। आज अन्य दिनों की बजाय ठंड अधिक है। ज्यादातर सवारियाँ गर्म कपड़ों में लिपटी हुई। जरूरी भी है, क्योंकि ये गुलाबी ठण्ड बड़ी खतरनाक होती है। पता नहीं चलता कब बीमार कर दे। इधर-उधर नजर दौड़ाई तो देखा कि सब अपने मोबाइल में खोए हुए हैं। मैंने भी अपना मोबाइल निकाल लिया है। फेसबुक पर एक शानदार वीडियो सामने आ गया। विडियो का सार कुछ ऐसा है कि एक औरत अपने बच्चे को डाँट रही है । कहती है, तुम्हारा ध्यान कहाँ रहता है? पढ़ते नहीं। तभी बच्चे के पिता आ जाते हैं। बच्चे को डाँटते देखकर पूछते हैं क्या हुआ? औरत जवाब देती है, होना क्या था। विद्यालय से इसका रिपोर्ट कार्ड आया है। केवल ऐटी थ्री पर्सेंट मार्क्स आए हैं। उसके पिता भी उसे डाँटने लगते हैं । दूसरे बच्चों के साथ तुलना करते हुए कहते हैं कि उनके नाइंटी फोर, उनके नाइंटी फाइव आए हैं। पढ़ता नहीं है, इसकी ट्यूसन डबल कर दो। पूरे दिन पढ़ने बिठाओ, तब पता चलेगा इसे। इसके बाद दोनों पति-पत्नी उसके पास बैठकर पढ़ाते हैं। बच्चा जब खेलने जाने के लिए पूछता है तो पिता कहते हैं कुछ नहीं पढ़ाई करो। अपने मार्क्स देखें...
#सफर_जारी_है_21___ नमस्कार दोस्तो । दीपावली पर मोबाइल शुभकामना के संदेशों से भरा पड़ा है। कई बार इन संदेशों में कोई ऐसा संदेश भी आ जाता है जो दिल को छू लेता है। ऐसा ही एक संदेश आज आया। यह संदेश वास्तव में एक कंपनी विशेष का विज्ञापन है परन्तु इसके फिल्मांकन और इसके संदेश ने दिल छू लिया। राजस्थानी वेशभूषा में एक अम्मा मिट्टी के दिपक लेकर बैठी है और बड़ी आशा से आते जाते लोगों को देख रही है। सब उसकी तरफ देख कर आगे बढ़ जाते हैं और अन्य दुकान में सामान खरीदने लगे हैं। बुड्ढी अम्मा से दिपक कोई नहीं खरीदता। उसी भीड़ में एक छोटा बच्चा भी अपनी मां के साथ खरीददारी करने आया है। वापस जाते समय अपनी मां से दिपक खरीदने के लिए कहता है परन्तु उसकी मां इनकार करते हुए आगे बढ़ जाती है। उस बच्चे की आंखें मुड़-मुड़ कर अम्मा की आंखों में छिपी व्यथा की ओर जा रही है। थोड़ी देर बाद वह बच्चा वापस आता है और अम्मा से दिपक खरीदता है। अम्मा उसे दो चार ज्यादा ही देती है। जाते जाते कहता है, अम्मा फिक्र मत करो। आपके सारे दिपक बिक जाएंगे। अम्मा अचम्भे के साथ उसे जाते हुए देखती है। इसके बाद बच्चा कुछ ऐसा करता है कि बु...