#सफर_जारी_है_11
सुहाना सफर और ये मौसम हसीं,
हम डर है हम खो न जाएं कहीं....
बड़ा शानदार गाना चल रहा है बस में। इस सफर में बड़ा आनन्द आ रहा है। बड़े अच्छे लोग मिले। कुछ अच्छी बातें सीखने को मिली। काश हर सफर इतना ही आनन्ददायक हो।
"आप तो 465 उतारोगे।" मैंने साथ बैठे गुरूजी से पुछा।
"हां, आपका स्टेंड आने वाला है।"
"हां जी आने वाला है। 390आर डी उतरना है। "
"सैकेंडरी परीक्षा का परिणाम आ गया क्या?"
"हां जी आ गया। रोजाना अखबार भरे रहते हैं । हमारे विद्यालय का विद्यार्थी जिला टॉपर 96%के साथ। हमारा तहसील टॉपर 95% के साथ। पता नहीं हो क्या गया है दुनिया को। बच्चों को नंबर मशीन समझ लिया है। बचपन छीन रहे हैं। घर और विद्यालय दोनों फुल प्रेशर रखतें हैं। बच्चे खेलना भूल गए।"
"सही कहते हो। अपने जमाने में ऐसा नहीं था। पढ़ाई के साथ खेलने का पूरा समय मिलता था। कभी नंबरों का दबाव नहीं रहा।"
"और नहीं तो क्या। मेरे बहुत से ऐसे दोस्त हैं जिनके औसत नंबर है। लेकिन आज वे अच्छे पदों पर कार्य कर रहे हैं। ये नंबर गेम बच्चों को कहीं का नहीं छोड़ेगा। जिनके 90%अंक आए हैं उनको शाबाशी दी जा रही है। तो जिनके कम क्या वो इंसान नहीं। उनकी परिस्थिति देखो । सबका दिमाग एक जैसा नहीं होता। उनके लिए 50%भी आसमान छू लेना है। "
मैं थोड़ा रुक कर बोला " सब अपने बच्चों को महान बनाना चाहते हैं। इंसान बनाने की नहीं सोचते। यदि अच्छा इंसान बनाएंगे तो महान अपने आप बन जाएंगे। ये अच्छी बात है कि हम अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। लेकिन उन पर अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को न थोपें। हम हमारे सपनों को पूरा करने के लिए उनके सपनों को दफ़न कर रहे हैं। यह हमारे लिए, बच्चे के लिए, समाज के लिए खतरनाक साबित होने वाला है। गुब्बारे को यदि हद से ज्यादा दबाया जाए तो फट जाता है। हमें इस गुब्बारे को फोड़ना नहीं है । केवल सही आकार देना है। "
साथ बैठे गुरूजी बोले," सही कह रहे हो जी। हमें सबका समावेशी विकास करना है। भारत के भविष्य को हीन भावना के मकड़जाल में जाने से बचाना है तो इस विषय पर सोचना पड़ेगा और बहुत जल्द सोचना पड़ेगा। "
"390 सुरजनसर वाले आगे आओ भाई रे ।" कडंक्टर की आवाज आई।
तो ठीक है जी ।मेरा गांव आ गया।आपके साथ बहुत आनन्द आया।
ये सफर यहीं तक.... मिलेंगे किसी और सफर में....
.....
.....
तो जय जय....
सफर कभी खत्म नहीं होता
क्योंकि जिंदगी इक सफ़र है सुहाना... यहां कल क्या होगा किसने जाना .. ....
सफर जारी है........
सुहाना सफर और ये मौसम हसीं,
हम डर है हम खो न जाएं कहीं....
बड़ा शानदार गाना चल रहा है बस में। इस सफर में बड़ा आनन्द आ रहा है। बड़े अच्छे लोग मिले। कुछ अच्छी बातें सीखने को मिली। काश हर सफर इतना ही आनन्ददायक हो।
"आप तो 465 उतारोगे।" मैंने साथ बैठे गुरूजी से पुछा।
"हां, आपका स्टेंड आने वाला है।"
"हां जी आने वाला है। 390आर डी उतरना है। "
"सैकेंडरी परीक्षा का परिणाम आ गया क्या?"
"हां जी आ गया। रोजाना अखबार भरे रहते हैं । हमारे विद्यालय का विद्यार्थी जिला टॉपर 96%के साथ। हमारा तहसील टॉपर 95% के साथ। पता नहीं हो क्या गया है दुनिया को। बच्चों को नंबर मशीन समझ लिया है। बचपन छीन रहे हैं। घर और विद्यालय दोनों फुल प्रेशर रखतें हैं। बच्चे खेलना भूल गए।"
"सही कहते हो। अपने जमाने में ऐसा नहीं था। पढ़ाई के साथ खेलने का पूरा समय मिलता था। कभी नंबरों का दबाव नहीं रहा।"
"और नहीं तो क्या। मेरे बहुत से ऐसे दोस्त हैं जिनके औसत नंबर है। लेकिन आज वे अच्छे पदों पर कार्य कर रहे हैं। ये नंबर गेम बच्चों को कहीं का नहीं छोड़ेगा। जिनके 90%अंक आए हैं उनको शाबाशी दी जा रही है। तो जिनके कम क्या वो इंसान नहीं। उनकी परिस्थिति देखो । सबका दिमाग एक जैसा नहीं होता। उनके लिए 50%भी आसमान छू लेना है। "
मैं थोड़ा रुक कर बोला " सब अपने बच्चों को महान बनाना चाहते हैं। इंसान बनाने की नहीं सोचते। यदि अच्छा इंसान बनाएंगे तो महान अपने आप बन जाएंगे। ये अच्छी बात है कि हम अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। लेकिन उन पर अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को न थोपें। हम हमारे सपनों को पूरा करने के लिए उनके सपनों को दफ़न कर रहे हैं। यह हमारे लिए, बच्चे के लिए, समाज के लिए खतरनाक साबित होने वाला है। गुब्बारे को यदि हद से ज्यादा दबाया जाए तो फट जाता है। हमें इस गुब्बारे को फोड़ना नहीं है । केवल सही आकार देना है। "
साथ बैठे गुरूजी बोले," सही कह रहे हो जी। हमें सबका समावेशी विकास करना है। भारत के भविष्य को हीन भावना के मकड़जाल में जाने से बचाना है तो इस विषय पर सोचना पड़ेगा और बहुत जल्द सोचना पड़ेगा। "
"390 सुरजनसर वाले आगे आओ भाई रे ।" कडंक्टर की आवाज आई।
तो ठीक है जी ।मेरा गांव आ गया।आपके साथ बहुत आनन्द आया।
ये सफर यहीं तक.... मिलेंगे किसी और सफर में....
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तो जय जय....
सफर कभी खत्म नहीं होता
क्योंकि जिंदगी इक सफ़र है सुहाना... यहां कल क्या होगा किसने जाना .. ....
सफर जारी है........
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