सफर_जारी_है_22

पालीवाला की तरफ सफर शुरू हो चुका है। आज अन्य दिनों की बजाय ठंड अधिक है। ज्यादातर सवारियाँ गर्म कपड़ों में लिपटी हुई। जरूरी भी है, क्योंकि ये गुलाबी ठण्ड बड़ी खतरनाक होती है। पता नहीं चलता कब बीमार कर दे। इधर-उधर नजर दौड़ाई तो देखा कि सब अपने मोबाइल में खोए हुए हैं। मैंने भी अपना मोबाइल निकाल लिया है। फेसबुक पर एक शानदार वीडियो सामने आ गया। विडियो का सार कुछ ऐसा है कि एक औरत अपने बच्चे को डाँट रही है । कहती है, तुम्हारा ध्यान कहाँ रहता है? पढ़ते नहीं। तभी बच्चे के पिता आ जाते हैं। बच्चे को डाँटते देखकर पूछते हैं क्या हुआ? औरत जवाब देती है, होना क्या था। विद्यालय से इसका रिपोर्ट कार्ड आया है। केवल ऐटी थ्री पर्सेंट मार्क्स आए हैं। उसके पिता भी उसे डाँटने लगते हैं । दूसरे बच्चों के साथ तुलना करते हुए कहते हैं कि उनके नाइंटी फोर, उनके नाइंटी फाइव आए हैं। पढ़ता नहीं है, इसकी ट्यूसन डबल कर दो। पूरे दिन पढ़ने बिठाओ, तब पता चलेगा इसे। इसके बाद दोनों पति-पत्नी उसके पास बैठकर पढ़ाते हैं। बच्चा जब खेलने जाने के लिए पूछता है तो पिता कहते हैं कुछ नहीं पढ़ाई करो। अपने मार्क्स देखें हैं? बच्चे पर पढ़ाई का इतना दबाव डाला जाता है कि वह बीमार हो जाता है। जब डॉक्टर को दिखाया जाता है तो दवाई देकर कहते हैं कि ये दवाएँ ले जाओ ठीक हो जाएगा। डॉ. कहते हैं कि आपका बच्चा स्ट्रेस में है। मुझे एक बात समझ नहीं आती कि इतनी कम उम्र में किस चीज का इतना स्ट्रेस है। आपको ध्यान रखना होगा नहीं तो ज्यादा समस्या हो सकती है।
वापस लौटते समय उसे याद आता है कि कैसे उसके पिता उसके साथ खेलते थे। किस प्रकार उसे पकड़ने के लिए पीछे दौड़ते थे। कैसे उसके तैंतीस प्रतिशत से उत्तीर्ण होने पर मिठाई बांटी थी।
उसकी पत्नी जब आवाज लगाती है तो वह वर्तमान में लौट आता है। वह कहता है कि मुझे पता चल गया है कि यह कैसे ठीक होगा। इसे बीमार करने वाले हम ही हैं। वह अपनी गाड़ी एक पेड़ के नीचे रोक देता है जहाँ कुछ बच्चे खेल रहे हैं। उनका बेटा कुछ सकुचाता है फिर उनके साथ खेलने लगता है। वह आदमी भी उनके साथ खेल रहा है। उसकी पत्नी कुछ देर देखती रहती है कि ये क्या हो रहा है। बाद में वह भी उनके साथ शामिल हो जाती है। धीरे-धीरे उनका बेटा भी ठीक हो जाता है। इस खेल के दौरान बैकग्राउंड से बोले जा रहे शब्द बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। जरा ध्यान से पढ़ें .....
"" नाइंटी सेवन, नाइंटी ऐट, नाइंटी नाइन, प्वाइंट नाइन नाइन इन्हीं अक्षरों तक स्थिर हो चुकी है हमारी गिनती ...
जरा ठहर कर ,जरा थम कर, कान लगाकर सुनिए तो सही इनकी भी विनती .........
क्या है इन नन्ही नजरों में, किस जहाँ का ख्वाब देखती है ये....
किस हसरत को पाना चाहती है ये, कैसी हवा में सांस लेना चाहती है ये......
कहीं किसी घुटन में तो नहीं, किसी बोझ तले तो नहीं.....
ये एक हसीं फसाना है कल का, गूँजता सुरमयी तराना है कल का....
यूँ नंबर्स के बोझ तले ये गूँज दब न जाए.......
कहीं इनके ख्वाब मर न जाए.....
कितना प्यारा और कितना महत्वपूर्ण संदेश इस विडियो में दिया गया है। उस बच्चे के पिता तो समझ गए, शायद आप भी समझ गए होंगे।

अलविदा दोस्तो.... मिलते एक नए सफर में.......

सफर जारी है...............

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