#सफर_जारी_है_23
दीपावली के आगे का दिन, जिसे हमारे यहां राम-रमी का दिन कहते हैं, आज है । मैं और सुभाष, मेरा चचेरा भाई , घर पर चौकी पर बैठे हैं। हमारे पास मनीराम दादाजी आकर बैठ गए। उम्र ज्यादा नहीं है, यही कोई चालीस के आसपास। हमारे परिवार में ही है। राम-रमी के बाद बोले " मास्टर आजकल सुरतगढ़ चला गया।"
"हां दादाजी। सुरतगढ़ ही हूं। पालीवाला है पोस्टिंग।" मैं बोला ।
"चलो कोई बात नहीं। नौकरी चाहे कहीं करो, मेरा तो यही कहना है कि आपकी नौकरी और पढ़ाई की तभी सार्थकता है जब आप अपने आसपास के, आपके परिवार के, आपके स्कूल के बच्चों को आप सही रास्ते पर चलना सिखाओ। यदि आप ये काम नहीं करना चाहते तो आपसे अच्छा वह है जो किसी कारणवश नहीं पढ़ पाया, लेकिन हर पढ़ने वाले से ये कहता है कि भाई पढ़ ले नहीं तो हमारी तरह ऐसे ही भटकता रह जाएगा। हम नहीं पढ़ पाए। इसलिए हम ही जानते हैं कि हमारे साथ क्या बीत रही है। हमारी आपसे हमेशा ये अपेक्षा रहती है कि आप बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए रास्ता दिखाओगे। आपके बताए रास्ते पर चल कर एक भी कामयाब होता है तो उसके परिवार की खुशी आप महसूस करके देखना। ठीक है, चलता हूं। मुझे एक दो घरों में और जाना है।" ऐसा कहते हुए उठ कर चल पड़े ।
बात तो सही है। मैं बैठा सोच रहा हूं कि इनकी कसोटी पर कहां हूं ........
सफर जारी है ....
दीपावली के आगे का दिन, जिसे हमारे यहां राम-रमी का दिन कहते हैं, आज है । मैं और सुभाष, मेरा चचेरा भाई , घर पर चौकी पर बैठे हैं। हमारे पास मनीराम दादाजी आकर बैठ गए। उम्र ज्यादा नहीं है, यही कोई चालीस के आसपास। हमारे परिवार में ही है। राम-रमी के बाद बोले " मास्टर आजकल सुरतगढ़ चला गया।"
"हां दादाजी। सुरतगढ़ ही हूं। पालीवाला है पोस्टिंग।" मैं बोला ।
"चलो कोई बात नहीं। नौकरी चाहे कहीं करो, मेरा तो यही कहना है कि आपकी नौकरी और पढ़ाई की तभी सार्थकता है जब आप अपने आसपास के, आपके परिवार के, आपके स्कूल के बच्चों को आप सही रास्ते पर चलना सिखाओ। यदि आप ये काम नहीं करना चाहते तो आपसे अच्छा वह है जो किसी कारणवश नहीं पढ़ पाया, लेकिन हर पढ़ने वाले से ये कहता है कि भाई पढ़ ले नहीं तो हमारी तरह ऐसे ही भटकता रह जाएगा। हम नहीं पढ़ पाए। इसलिए हम ही जानते हैं कि हमारे साथ क्या बीत रही है। हमारी आपसे हमेशा ये अपेक्षा रहती है कि आप बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए रास्ता दिखाओगे। आपके बताए रास्ते पर चल कर एक भी कामयाब होता है तो उसके परिवार की खुशी आप महसूस करके देखना। ठीक है, चलता हूं। मुझे एक दो घरों में और जाना है।" ऐसा कहते हुए उठ कर चल पड़े ।
बात तो सही है। मैं बैठा सोच रहा हूं कि इनकी कसोटी पर कहां हूं ........
सफर जारी है ....
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