#सफर_जारी_है_8

236 से कुछ सवारियां और चढ़ गई। बस अपनी रफ़्तार पकड़ रही है। ड्राईवर ने कोई पुराना गाना लगा रखा है। टिकट काटने के बाद कडेंक्टर भी हमारे पास आकर खड़ा हो गया। हमारी बातचीत जो थोड़ी देर पहले चल रही थी, में से कुछ बातें उसके कानों में पड़ी थी तो वह भी हमारी बातचीत में शामिल होते हुए बोला,"कुछ बच्चों के माता-पिता पढ़ाना चाहते हैं परन्तु बच्चे पढ़ते नहीं। "
मेरे साथ बैठे गुरूजी बोले ," सही है। कोई उनको पढ़ने के लिए कहे तो उनको बुरा लगता है। उसको वे अपना दुश्मन समझते हैं। समय निकलने के बाद पछताते हैं।"
"आप सही कहते हो। मेरे गुरूजी और घरवाले जब पढ़ने का कहते मुझे बहुत बुरा लगता। 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। छ:साल हो गए। अब सोचता हूं, पढ़ लेता तो ठीक रहता। मेरे साथ वाले कोई नोकरी कर रहा है कोई बिजनेस।" कडेंक्टर बोला।
"अब पढ़ना शुरू कर दो। अभी कोनसी देर हो गई।" साथ में बैठे गुरूजी बोले।
"पढ़ने की उम्र होती है गुरूजी। अब थोड़े ही पढ़ा जाएगा।" कन्डेक्टर बोला।
मैं बोला,"यह ग़लत कह दिया आपने। मैं एक उदाहरण बताता हूं। फिर निर्णय करना कि आपकी सोच कितनी सही है। मेरे गांव के स्कूल में इंद्राज जी कुकणा पदस्थापित है। उनका विवाह 1998 में हुआ ।उस समय उनकी पत्नी मंजू जी ने कक्षा 6 की वार्षिक परीक्षा दी थी। उस समय ग्रामीण क्षैत्र में बाल विवाह का ज्यादा प्रचलन था। घरवाले ये नहीं देखते थे कि अभी शादी की उम्र नहीं है या बच्चे पढ़ रहे हैं। आजकल काफी सुधार आया है। मंजू जी पढ़ाई में बहुत होशियार थी, कक्षा में हमेशा प्रथम स्थान। शादी के बाद पढ़ाई छूट गई। न तो मंजू जी की हिम्मत हुई ससुराल वालों से कहने की और न ही ससुराल वालों ने पहल की। एक परम्परागत संयुक्त परिवार में लगभग ऐसा ही होता है। पढ़ने की ललक बनी रही। इसलिए जो अखबार किताब मिलती पढ़ लेती।
2015 में व्याख्याता भर्ती आई तो इंद्राज जी ने तैयारी शुरू कर दी। एक दिन गुरूजी पढ़ रहे थे। मंजू जी उनकी किताबें देख रही थी। "पढ़ लो कोई किताब, पढनी है तो।" इन्द्राज ने वैसे ही कह दिया। मंजू जी ने मजाक में कहा "इनका क्या पढूं। मेरा कोई फार्म भरा होता तो अपनी किताब पढ़ती।"
संयोगवश उस समय 10वीं के परीक्षा फार्म भरे जा रहे थे। इंद्राज जी ने कहा"पढ़ना है तो दसवीं के फार्म भरे जा रहे हैं,भर देते हैं।"
"ना जी मैं तो मज़ाक कर रही थी। अब कोई उम्र थोड़ी है पढ़ने की।" मंजू जी ने कहा।
"अब तो फार्म भरना ही होगा। अब यही बात सिद्ध करनी है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। और नहीं तो मेरे साथ बैठी रहेगी। मुझे अकेला नहीं पढ़ना पड़ेगा।" इंद्राज जी ने कहा।
उन्होंने फार्म भरवा दिया । पढ़ाई छोड़ने के 18 साल बाद 2016 में मंजू जी ने प्रथम प्रयास में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की। 2017-2018 के जब परीक्षा फार्म भरे जाने लगे तो उन्होंने कहा कि मेरा 12वीं फार्म भरवा दो । इस साल उन्होंने 12वीं पास कर ली। अब उनका इरादा बी ए के बाद एम ए करने का भी है।
पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। आदमी कभी भी पढ़ना शुरू कर सकता है। लेकिन कोई काम करने के लिए दृढ़ निश्चय और कठोर परिश्रम की आवश्यकता होती है। " साथ बैठे गुरूजी ने मेरी सहमति में सिर हिलाया।
बस ने हार्न बजाया । लडाणा आने वाला है । कन्डेक्टर उठ कर फाटक की तरफ चल पड़ा।
बस में गाना चल रहा है ..... कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.........
सचमुच....

सफर जारी है........…

Comments

  1. बिल्कुल सही कहा पढने की कोई उम्र नहीं

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आपका नाम नहीं दिखाई दे रहा। साथ में अपना नाम लिखते तो ठीक रहता

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

सफलता राह देख रही है