#सफर_जारी_है_16

सूरतगढ़ के रिलायंस पैंट्रोल पंप बस स्टैंड पर बस का इंतजार हो रहा है । आजकल ड्यूटी पालीवाला स्कूल में होने के कारण सूरतगढ़ से अप-डाउन हो रहा है । बस स्टैंड पर एक महिला बैठी है जिनके हाथ में एक बैग है जिस पर सरस्वती शिक्षण संस्थान बींझबायला लिखा हुआ है। एक थैली में लपेट पट अर्थात लटकाने वाले ब्लैक बोर्ड है। इन सब चीजों को देख कर लगा कि ये शिक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं। परंतु उनकी उम्र देखते हुए संशय भी है। उनके पास एक बड़ा सा थैला भी है जिसमें कुछ खाने पीने का सामान लग रहा है। मैं उनसे बातचीत शुरू करने ही जा रहा था कि उनके पास खड़ी एक अन्य महिला जो कि सरकारी अध्यापिका है, ने बात शुरू कर दी। सुबह सुबह यहां से विद्यालय जाने वाले स्टाफ बस पकड़ते हैं। उन दोनों के बीच हो रही बातचीत सुनने लगा ‌
"आप बी. एड कर रहे हो।"
"नहीं, मेरी बहू कर रही है।"
"भाग्यशाली है आपकी बहू जो आप जैसी सास मिली।"
" बहुत मुश्किल से मनाया उसके ससुर को। जब वह मेरे घर आई तो बारहवीं कक्षा की परीक्षा दी थी। जब प्रथम वर्ष के परीक्षा फार्म भरने शुरू हुए तो ‌उसने डरते डरते मुझसे पढ़ने की बात की। उसने सोचा पता नहीं मेरी प्रतिक्रिया क्या होगी। ये सुनकर मैंने कहा ये बात पहले बताती। तुझे नियमित प्रवेश दिला देते। बहू ने बताया कि मैंने इनको तो कहा था। परंतु पापाजी के डर से इनकी हिम्मत नहीं हुई। अब मैंने सोचा कि मैं ही हिम्मत करती हूं। मेरे पति के विचार इस मामले में अलग है। वे बहू बेटी को घर के अंदर रखना ही पसंद करते हैं। मैंने जब कहा कि बहू आगे पढ़ना चाहती है तो सुनकर बिफर पड़े। बोले, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? मैंने उन्हें जैसे तैसे मनाया कि बहू रोजाना नहीं जाएगी। केवल परीक्षा देने जाना है। ये भी हमारी बेटी है। क्या हमें हमारी बेटी को नहीं पढ़ाना चाहिए? बाद में वे मान गए। बी. ए. के तीन सालों में मैंने उन्हें बहू को आगे बी. एड. करवाने के लिए मना लिया। अब वो पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है। आज मैं कुछ घरेलू सामान, कुछ ये उसकी पढ़ाई का सामान कुछ खाने पीने का सामान पहुंचाने जा रही हूं। उसका बी. एड. में दुसरा साल है।"
उनके अपनी बात खत्म करते ही बस आ गई। वे भी हमारे साथ बस में सवार हो गई। मैं सीट पर बैठते हुए उन्हें दिल ही दिल में सलाम किया। धन्य है ऐसी सास के रूप में मां जो अपनी बेटी रूपी बहू के लिए इतना कुछ कर रही है। आज समाज की सोच बदल रही है जिसका उदाहरण आज सुबह सुबह मुझे देखने को मिला ।

सफर जारी है......

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