सफर जारी है 15
बस में चढ़ते ही मैं सीट की तलाश में हूं। एक सीट जो खिड़की के पास हो ताकि सफर के साथ ठंडी-ठंडी हवा का आंनद ले सकूं। एक सीट नजर आई जिस पर एक नौजवान बैठा है। मैं उसे खिसका कर खिड़की की तरफ बैठ गया। यह आज का युवा है। एंड्रॉयड फोन के साथ खेल रहा है। मौसम सुहावना है। बारिश होने के कारण खिड़की से ताजा ठंडी हवा आ रही है।
मैंने बात शुरू करते हुए कहा, "क्या करते हो।"
" जी इसी वर्ष 12 वीं पास की है।"
"क्या विषय था।"
" गणित था।"
"कितने प्रतिशत बने ।"
" पचपन प्रतिशत । "
" नंबर तो कम ही बने हैं। क्या बात है विषय में रूचि नहीं है क्या ? "
मैंने डरते डरते कहा। सोचा कम नंबर का कहने पर नाराज़ न हो जाए। आजकल के नौजवानों से डर से लगता है। पता नहीं कौनसी बात पर नाराज़ हो जाए। मेरी आंशका के विपरित प्रतिक्रिया सकारात्मक है।
वो युवा बोला,"मेरी इच्छा कला लेने की थी। पर पापा बोले तुझे इंजीनियरिंग करनी है। मुझे चित्र बनाना पसंद है। मैं चित्रकला विषय में आगे बढ़ना चाहता हूं। मैंने ये बात पापा को बताई तो उन्होंने मुझे कहा कि मैं चाहता हूं कि तुम पढ़ लिख कर कामयाब बनो। मैं तुम्हें इंजीनियर बनाना चाहता हूं। क्या तुम्हारा कर्तव्य नहीं है कि तुम मेरे सपने पूरे करो। मेरे भी कुछ सपने हैं, ये बात पापा को कहना चाहता था पंरतु उस समय नहीं कह पाया। अब रिजल्ट आने के बाद मैंने पापा से कहा कि आपके कहने पर पढ़कर इंजीनियरिंग तो कर लूंगा। परंतु मेरा मन कभी इसमें नहीं लगेगा। आप मुझे खुश देखना चाहते हैं या अपने सपने पुरे करना चाहते हैं। हो सकता है जो मैं करना चाहता हूं , उसमें कामयाब न हो पाऊं। परंतु मैं उस काम में मेरी खुशी छिपी है। उस समय तो पापा ने कुछ नहीं कहा। दो दिन बाद मुझे मेरी पसंद का विषय चुनने की आजादी देते हुए कहा कि हर मां बाप अपनी संतान को खुश और कामयाब देखना चाहते हैं । कई बार अपने सपनों को पूरा करने के लिए उनसे गलत निर्णय भी हो जाता है । मेरी खुशी तुम्हारी खुशी में ही छिपी है। अब मैं जयपुर जा रहा हूं आर्ट में डिग्री करने। " इतना कहकर ईयरफोन कान में डाल लिए और मोबाइल में कुछ बनाने लगा।
मैं खिड़की से बाहर देखता हुआ देखता हुआ सोच रहा हूं कि हर अभिभावक को यह बात समझनी चाहिए कि बच्चों की कुछ रूचियां होती है । बच्चों के साथ उन्हें इस पर बातचीत करते रहना चाहिए। उन्हें अपनी बात कहने का मौका देना चाहिए और तर्कसंगत और जायज बात उनका समर्थन भी करना चाहिए ।
..... आपका क्या ख्याल है.......
सफर अभी शुरू हुआ है.............
बस में चढ़ते ही मैं सीट की तलाश में हूं। एक सीट जो खिड़की के पास हो ताकि सफर के साथ ठंडी-ठंडी हवा का आंनद ले सकूं। एक सीट नजर आई जिस पर एक नौजवान बैठा है। मैं उसे खिसका कर खिड़की की तरफ बैठ गया। यह आज का युवा है। एंड्रॉयड फोन के साथ खेल रहा है। मौसम सुहावना है। बारिश होने के कारण खिड़की से ताजा ठंडी हवा आ रही है।
मैंने बात शुरू करते हुए कहा, "क्या करते हो।"
" जी इसी वर्ष 12 वीं पास की है।"
"क्या विषय था।"
" गणित था।"
"कितने प्रतिशत बने ।"
" पचपन प्रतिशत । "
" नंबर तो कम ही बने हैं। क्या बात है विषय में रूचि नहीं है क्या ? "
मैंने डरते डरते कहा। सोचा कम नंबर का कहने पर नाराज़ न हो जाए। आजकल के नौजवानों से डर से लगता है। पता नहीं कौनसी बात पर नाराज़ हो जाए। मेरी आंशका के विपरित प्रतिक्रिया सकारात्मक है।
वो युवा बोला,"मेरी इच्छा कला लेने की थी। पर पापा बोले तुझे इंजीनियरिंग करनी है। मुझे चित्र बनाना पसंद है। मैं चित्रकला विषय में आगे बढ़ना चाहता हूं। मैंने ये बात पापा को बताई तो उन्होंने मुझे कहा कि मैं चाहता हूं कि तुम पढ़ लिख कर कामयाब बनो। मैं तुम्हें इंजीनियर बनाना चाहता हूं। क्या तुम्हारा कर्तव्य नहीं है कि तुम मेरे सपने पूरे करो। मेरे भी कुछ सपने हैं, ये बात पापा को कहना चाहता था पंरतु उस समय नहीं कह पाया। अब रिजल्ट आने के बाद मैंने पापा से कहा कि आपके कहने पर पढ़कर इंजीनियरिंग तो कर लूंगा। परंतु मेरा मन कभी इसमें नहीं लगेगा। आप मुझे खुश देखना चाहते हैं या अपने सपने पुरे करना चाहते हैं। हो सकता है जो मैं करना चाहता हूं , उसमें कामयाब न हो पाऊं। परंतु मैं उस काम में मेरी खुशी छिपी है। उस समय तो पापा ने कुछ नहीं कहा। दो दिन बाद मुझे मेरी पसंद का विषय चुनने की आजादी देते हुए कहा कि हर मां बाप अपनी संतान को खुश और कामयाब देखना चाहते हैं । कई बार अपने सपनों को पूरा करने के लिए उनसे गलत निर्णय भी हो जाता है । मेरी खुशी तुम्हारी खुशी में ही छिपी है। अब मैं जयपुर जा रहा हूं आर्ट में डिग्री करने। " इतना कहकर ईयरफोन कान में डाल लिए और मोबाइल में कुछ बनाने लगा।
मैं खिड़की से बाहर देखता हुआ देखता हुआ सोच रहा हूं कि हर अभिभावक को यह बात समझनी चाहिए कि बच्चों की कुछ रूचियां होती है । बच्चों के साथ उन्हें इस पर बातचीत करते रहना चाहिए। उन्हें अपनी बात कहने का मौका देना चाहिए और तर्कसंगत और जायज बात उनका समर्थन भी करना चाहिए ।
..... आपका क्या ख्याल है.......
सफर अभी शुरू हुआ है.............
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