#सफर_जारी_है 14

बातों बातों में कब 330 गोपालसर आ गया, पता ही नहीं चला। महावीर अर्जनसर की तरफ चल पड़ा। मैं बस के इंतजार में खड़ा हूं। 330 आर डी एक चौराहा है। जिससे एक तरफ सूरतगढ़, एक तरफ छतरगढ़, एक तरफ श्रीविजयनगर और एक तरफ अर्जनसर है। सुबह का समय है। ज्यादा चहल पहल नहीं है। डेली अप डाउन करने वाले जिसमें कुछ कॉलेज स्टूडेंट कुछ दुकानों पर काम करने जाते हैं तथा कुछ ऐसे जिन्हें बाजार जाना है, बस के इंतजार में हैं। दुकानें अभी खुलना शुरू हुई है। कुछ साल पहले यहां एक दो दुकानें होती थी। अब धीरे धीरे एक छोटे बाजार के रूप में बढ़ रहा है 330 आर डी। एक नल लगा है। जिस पर कुछ लड़के खड़े हैं जो बारी बारी से पानी पी रहे हैं। नल के चारों तरफ पानी इकट्ठा है और उसमें कचरा गिरने के कारण किचड़ हो रहा है। पास की दुकान पर फावड़ा पड़ा है। यदि थोड़ी सी मेहनत से पानी निकालने की जगह बनाई जाए तो वहां सफाई हो जाए। परंतु इतनी जहमत कोई नहीं उठा रहा। इन लड़कों में कुछ अपने कालेज में स्वच्छता पर बड़े बड़े भाषण दे चुके हैं। एक बुजुर्ग मटके के साथ नल की तरफ आ रहा है। बुजुर्ग ने मैली कुचैली बनियान और लुंगी जो घुटनों तक है, पहन रखी है। नल पर खड़े लड़के उस बुजुर्ग को देखकर हंसे और उसके मैले कपड़ों पर टीका टिप्पणी करने लगे। उन्हें नल के पास पड़ा किचड़ दिखाई नहीं दिया, बुजुर्ग के कपड़े दिखाई दे गए। बुजुर्ग नल के पास आए फावड़ा उठाया और पानी नल के पास से निकाल कर सफाई की। घड़े को नल के नीचे रख कर उन लड़कों की तरफ देखा। लड़के नजरें चुरा कर"बस आने वाली है" कहते हुए वहां से हट गए। थोड़ी देर पहले जो जोर जोर से हंस रहे थै अब चुप है। शायद उन्हें अपने व्यवहार पर शर्म आ रही हो ....
मैं मन ही मन की बुजुर्ग को सलाम करता हुआ बस की तरफ बढ़ा रहा हूं.........

सफर जारी है..........

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