#सफर_जारी_है_12

बस के इंतजार में बस स्टेंड पर खड़ा हूं। कल बारिश होने के कारण मौसम खुशगवार है। बस आने में अभी समय है। अभी एक ट्रेक्टर आ कर रूका। ट्रेक्टर से एक बुजुर्ग और एक छोटी लड़की उतरे। लड़की का चेहरा मुरझाया हुआ है। ऐसा लग रहा है जैसे काफी दिनों से बिमार है।
"सूरतगढ़ वाली बस कब तक आएगी।" ट्रेक्टर पर बैठे युवक ने पूछा।
"अभी दस मिनट बाद।" मैं बोला
वह युवक यह बोलते हुए चल पड़ा कि,"आते समय फोन कर देना।"
बुजुर्ग ने हां मैं सिर हिलाया।
दोनों मेरे पास आकर खड़े हो गए। मैंने बात शुरू करने की गरज से बोला,"ये आपकी पोती है क्या?"
"हां",संक्षिप्त उतर देकर बुजुर्ग चुप हो गया।
मैंने फिर बात शुरू करते हुए कहा,"सूरतगढ़ जा रहे हो क्या?"
"हां,ये बीमार है। इसको डॉक्टर के पास ले जाना है।"
"बड़ी कमजोर दिखाई दे रही है। काफी दिनों से बीमार लग रही है। क्या हुआ है इसको।"
बुजुर्ग बोले,"पहले तो इसे सर्दी लगी। कुछ दिन सोचा अपने आप ठीक हो जाएगी। बाद जब हालत बिगड़ने लगी तो भी इसे अच्छे डॉक्टर को न दिखा कर झोलाछाप डॉक्टर के पास ले गए। लंबे समय तक सर्दी बुखार रहने के कारण निमोनिया बन गया। डॉक्टर ने कहा मैं निमोनिया का इलाज कर दूंगा हमनें सोचा बाजार जाएंगे तो दौ सौ, तीन सौ किराए के लग जाएंगे। दवाईयों के अलग। यही सोचकर उसी डॉक्टर से एक इंजेक्शन लगवा लिया। आज फिर इंजेक्शन लगवाने गया तो वहां कुछ ऐसा घटित हुआ कि मेरी आंखें खुल गई।"
मैंने उत्सुकता से पूछा,"ऐसा क्या हुआ?"
बुजुर्ग बोले,"डॉक्टर सिरींज में दवाई डालकर इंजेक्शन लगाने की तैयारी में था। तभी डॉक्टर का लड़का आया और बोला गाड़ी आ गई। आओ चलें। मैंने पूछा कहीं जा रहे हो क्या। डाक्टर ने जवाब दिया कि हां मेरी लड़की को निमोनिया हो गया है उसे दिखाने जा रहा हूं। मैं अवाक रह गया। मैंने कहा कि निमोनिया का इलाज तो आप खुद करते हो। फिर किसे दिखाने जा रहे हो? डाक्टर मेरी बात का क्या जवाब देता। जवाब उसके पास था ही नहीं। बात बदलते हुए बोला ,लाओ इंजेक्शन लगा देता हूं, लेट हो रहा हूं। मैंने खड़े होते हुए कहा हमें नहीं लगवाना इंजेक्शन। डाक्टर ने कहा, मैंने सिरींज में दवाई डाल ली है, इसका क्या करूं।
अपनी बेटी के लगा देना, उसे भी निमोनिया है। ऐसा कहते हुए मैं वहां से निकल आया। डाक्टर मुझे देखता ही रह गया।"
इतना कहकर बुजुर्ग चुप हो गए। तभी एक गाड़ी स्टैंड से थोड़ा आगे रुकी और वापस बैक आने लगी। शायद मेरा कोई जानकर होगा ये सोचते हुए मैं गाड़ी की तरफ बढ़ चला , ये सोचते हुए कि आज भी हमारे गांवों में स्वास्थय सेवाओं का क्या हाल है। लोगों में जागरूकता का कितना अभाव है। सब कुछ जानते हुए भी हालात जब काबू में नहीं रहते तब भागते हैं। इसमें दोष किसका है। उनका जिनके पास साधन नहीं है, पैसे नहीं हैं । सरकार का जो अब भी सुलभ चिकित्सा उपलब्ध नहीं करवा पाई है या उनका जो जानबूझ कर केवल अपना पेट पालने के लिए लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपके पास कोई जवाब हो तो मुझे भी बताएं..........
सफर अभी शुरू हुआ है.........

सफर जारी है....

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