***सफर जारी है..3
285RD से मैं भी तीन वाली सीट पर गुरुजनों के साथ आ कर बैठ गया। मैंने कहा,आपकी बात सही है। कई बार दृढ़ निश्चय भी होता है फिर भी जैसा हम चाहते हैं वैसा नहीं होता। इसका कारण ये नहीं होता कि हमने मेहनत नहीं की। मेरे एक दोस्त को किसी ने बताया कि जोजोबा-होहोबा की खेती में बहुत फायदा है। इजरायल में रेगिस्तानी इलाकों में लोग इससे काफी मुनाफा कमा रहे हैं। जलवायु भी हमारे जैसी है। मेरे दोस्त ने सोचा कि मेरे भी बारानी जमीन पड़ी है उस पर खेती कर लेता हूं। वो कहीं से बीज ले आया और जोजोबा की खेती कर ली। पहले साल कुछ भी नहीं हुआ। उसे जोजोबा की खेती का अनुभव नहीं था। उसे नहीं पता था कि कैसे बोना है, कब काटना है। घरवालों ने लताड़ा क्यों पैसे खराब कर रहा है। उसने कहा मैं ये खेती कर के दिखलाऊंगा। उसने इधर-उधर से जोजोबा की खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की। मुनाफा अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुआ। फिर किसी ने उसे बताया कि जोजोबा से ज्यादा इसके तेल की कीमत है। आगे वाले साल उसने इसका तेल निकाल कर बेचा । इस बार मुनाफा ज्यादा हुआ ।
अब उसे राह मिल गई। उसने दो चार किसानों को और तैयार किया तथा अपने खेत में जोजोबा का तेल निकालने वाली मशीन लगा ली । अब उसका तेल निकालने का खर्च बच गया तथा अन्य किसानों से उनकी फसल खरीदकर उसका तेल भी वो खुद निकालकर डबल मुनाफा कमा रहा है। तो गुरूजी कामयाब होने के लिए तरीके बदलने पड़ेंगे इरादे नहीं। यदि एक दो बार असफल होने पर इरादे बदल लिए तो मझधार में रह जाएंगे। यदि हम इरादे मजबूत करके तरीके बदल लें तो जरूर कामयाब होंगे। अब दुसरे गुरूजी भी मेरी बात से सहमत नजर आए।
" 236-236 ,आ जाओ भाई " कडंक्टर की आवाज आई । एक झटका लगा और बस रूक गई।
..... परंतु सफर अभी जारी है...... ..

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